December 24, 2011

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जयशिव ओमकारा, प्रभु जय शिव ओमकारा ब्रह्म विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा, हर हर महादेव... एकाना, चतुरानन, पंचना राजे, हंसन गरुदासन वृषवाहन सजे, हर हर महादेव॥ दो भुज, चारु चतुर्भाऊ देशमुख अति सोहे तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन्मोहे, हर हर महादेव॥ अक्श्यमाला बनमाला मुन्द्मल धरी चंदन मृगमद सोहाई, भले शुभकारी, हर हर महादेव॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बगाम्बर अंगे, ब्रह्मादिक सनकादिक प्रेतादिक संगे, हर हर महादेव॥ कर मध्ये कमंदालू त्रिशूल भरी, सुखकारी दुखाहरी जग्पलानकारी, हर हर महादेव॥ ब्रह्म विष्णु सदाशिव जानत अविवेका, प्रनावाक्षर में शोभित ये तीनों एक, हर हर महादेव॥ त्रिगुण स्वामी की आरती जो कोई नर गवेकाहत शिवानन्द स्वामी मन वांछित फल पावे।
हर हर महादेव॥ हर हर महादेव॥ हर हर महादेव॥ हर हर महादेव॥ हर हर महादेव..

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